Wednesday, 20 April 2022

#सामयिक विषयों पर चर्चा YDMS👑

 सामयिक विषय 

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हिंदुओं पर घात अंतर्राष्ट्रीय जिहादी कुचक्र, रासुका में हो कार्यवाही: डॉ सुरेन्द्र जैन 
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*युदस/विहिप नदि 19 अप्रैल 22:* विहिप की 16 अप्रैल को जारी प्रेस विज्ञप्ति (संपादित) के अनुसार, विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र कुमार जैन ने कहा है कि रामनवमी के पावन कार्यक्रमों पर मुस्लिम समाज द्वारा किए जा रहे हिंसक घातक्रम, निर्बाध चल रहा है। उड़ीसा, गोवा अपेक्षाकृत शांत प्रदेश माने जाते हैं। वहां भी रामोत्सव पर घात घोर चिंता का विषय है। विगत दिनों JNU सहित 20 से अधिक स्थानों पर रामनवमी के आयोजनों पर हिंसक घात किए गए। घरों की छतों से पत्थर, ईटें, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें आदि फेंके गये। अवैध हथियार लहराते हुए जिहादियों की भीड़ ने हिंदुओं पर घात किए। महिलाओं की अस्मिता लूटने का प्रयास किया गया, मंदिरों को तोड़ा गया तथा पुलिसकर्मियों पर भी प्राणघाति घात किए गए।

विहिप का मानना है कि ये घात आतंकवादी कार्यवाही हैं। हर हिंसक और उसको शरण देने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्यवाही होनी चाहिए।  अल-जवाहरी के वीडियो से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय कुचक्र है। भारत के एक आतंकी संगठन पीएफआई की भूमिका अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। इन हिंसक घात के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारत विरोधी "टूल किट गैंग" का आर्थिक, बौद्धिक व राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। दुर्भाग्य से भारत के अधिकांश मुस्लिम नेता और कांग्रेस तथा उनके कोख से निकले सभी दल, इन घातक दलदल में एक साथ खड़े हो गए हैं। टीवी स्टूडियो से लेकर सड़क और न्यायालय तक हर कहीं यह "टूल किट गैंग" इन जिहादियों की रक्षा में एकजुट हो गया है। सोशल मीडिया पर भी मुसलमानों को भड़काने वाले प्रयास विदेशों में रहने वाले कई धनिक जेहादी कर रहे हैं। गत दिनों सोशल मीडिया पर एक बड़ी सक्रियता इन जिहादी तत्वों के द्वारा दिखाई दी। ये भारत विरोधी वातावरण बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे। यह तथ्य सामने आया कि इसमें भारत से बाहर के लोगों का 87% सहयोग है। हमारा यह आरोप सिद्ध हो जाता है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय कुचक्र के अंतर्गत किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि वे भारत में गृह युद्ध की स्थिति निर्माण करना चाहते हैं। 

डॉ जैन ने कहा कि यह बर्बर हिंसा रमजान के कथित पवित्र माह में हो रही है। क्या जिहादियों की पवित्रता का अर्थ हिंदुओं का नरसंहार है, महिलाओं पर बलात्कार के प्रयास, मंदिरों को ध्वस्त करना, मकानों व दुकानों को लूट कर आग लगा देना, पुलिसकर्मियों पर गोलियां चलाना दलितों के घरों को आग लगाकर उनकी महिलाओं के साथ अपमान करना है?

उन्होंने कहा कि एक बात स्पष्ट हो गई है कि, "मीम और भीम" के नारे लगाने वाले भी पीएफआई के ही 'एजेंट' है। अनुसूचित समाज का वर्ग सदा से जिहादियों का सामना करने में सबसे आगे रहता है। इनके साथ मित्रता का नारा दलितों के जनधन पर एक निकृष्ट राजनीति करने का प्रयास है। अब उनका घृणित चेहरा भी प्रत्यक्ष हो गया है। उनके मुंह से इन दानवों के विरोध लिए, एक शब्द भी निकला? 

इन घटनाओं से कुछ आधारभूत प्रश्न खड़े होते हैं :

1. मुस्लिम समाज की हठधर्मिता के कारण ही धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हुआ था। स्वतंत्रता के बाद भी ये जिहादी हिंदुओं पर घात करने का कोई ना कोई कारण ढूंढ लेते हैं। CAA का भारतीय मुस्लिम समाज से कोई लेना-देना नहीं था, किन्तु शाहीन बाग, शिव विहार जैसे पचासियों स्थानों पर इन्होंने कानून व्यवस्था को ध्वस्त किया और हिंदुओं पर घात किए। हिजाब का विषय एक विद्यालय के गणवेश का विषय था। परंतु जिस प्रकार निर्णय देने वाले न्यायाधीशों को धमकी दी गई और हर्षा की निर्मम हत्या की गई, उससे इनकी मानसिकता स्पष्ट हो जाती है। कुछ लोग कहते हैं कि जिनको भारत में हिंदुओं से प्यार था वही भारत में रह गए। यदि यह सत्य है तो ये घटनाएं क्यों होती हैं? क्यों अभी तक कोई बड़ा मुस्लिम नेता इन हिंसक घटनाओं या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का विरोध नहीं करता? मुर्तजा जैसे आतंकी के साथ ये सब क्यों खड़े हुए दिखाई देते हैं? 

((प्रश्न: 30 करोड़ में से कुछ मुट्ठी भर, अब्दुल कलाम अथवा अब्दुल हमीद, अपवाद, अन्य कितने हैं? इसके विपरीत जिहादियों के समर्थन में करोड़ों हैं?)) 

2. एक बात बार-बार कही जाती है कि भड़काऊ नारे लगाए गए। कौन से भड़काऊ नारे? ‘जय श्री राम’, व ‘भारत माता की जय’ भड़काऊ नारा कैसे हो सकते हैं? इसके विपरीत कट्टरपंथियों के कई कार्यक्रमों में 'सर धड़ से जुदा होगा' या 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' नारे लगाना क्या भड़काऊ नारे नहीं है? विश्व इतिहास का सबसे भड़काऊ नारा है तो "ला इलाह इल्लल्लाह, मोहम्मद उर रसूल अल्लाह" है। क्या दिन में 5 बार अजान के समय 'केवल अल्लाह की पूजा की जा सकती है किसी और की नहीं' यह कहकर वे हिंदुओं को भड़काने का प्रयास नहीं करते? यदि भड़काऊ नारे के नाम पर ही रामनवमी पर हमलों को ये उचित 'जायज' ठहराते हैं तो इनके नारों के विरोध में हिंदुओं को क्या करना चाहिए? 

3. इस्लाम से सबसे अधिक पीड़ित समाज भारत के मुसलमान हैं। 85% मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे, जिनको बलात् मूसलमान बनाया गया। उनके मन में इन मुस्लिम आक्रमणकारियों के प्रति श्रद्धा नहीं, घृणा होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि भारत का मुसलमान 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' से पीड़ित है। इस सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति अपने ऊपर अत्याचार करने वाले से प्यार करने लग जाता है और उसके मार्ग पर चलने लग जाता है। किन्तु सौभाग्य से एक दूसरा वर्ग भी है, जो दारा शिकोह, रसखान और एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानता है। इस दूसरे देश भक्त समाज की आवाज दब रही है। दुर्भाग्य से जो आक्रमणकारियों के साथ खड़ा है, वही नेतृत्व करता हुआ दिखाई देता है। इसलिए रजाकारों के मानस पुत्र सहित सभी मुस्लिम नेता आज मुस्लिम समाज को भड़काने का प्रयास करते हैं।

4. कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति के कारण ही भारत का विभाजन हुआ था। दुर्भाग्य से कांग्रेस की यह नीति स्वतंत्रता के बाद भी नहीं बदली। स्वतंत्र भारत में आतंकवाद के सभी स्वरूपों के पीछे कांग्रेस और इनके कोख से जन्म लेने वाले सभी तथाकथित शर्म निरपेक्ष दलों की दलदल हैं। यह तथ्य है कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार के संरक्षण में ही SIMI फली फूली थी और आज भी इन्होंने एक गलत तथ्य को ट्वीट करके मध्य प्रदेश को दंगों की आग में झोंकने का असफल प्रयास किया है। राजस्थान में दंगाइयों को पकड़ने के विपरीत गहलोत सरकार ने जिस प्रकार सभी धार्मिक शोभा यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, वह इसी मानसिकता को दर्शाता है। रामनवमी, महावीर जयंती, गुरु तेग बहादुर आदि की शोभायात्राओं के ऊपर तो पाबंदी लग गई, किन्तु यह निश्चित है मोहर्रम आने तक यह पाबंदी हटा दी जायेगी। हिंदुओं की शोभायात्रा पर पाबंदी लगाने वाली कांग्रेस की शव यात्रा शीघ्र ही निकालेगी यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

5. यह विचारणीय तथ्य है कि दंगे वहीं क्यों होते हैं जहां हिंदू अल्पसंख्या में होता है। विश्व हिंदू परिषद गंभीरता से चाहती है कि हमें वह दिन नहीं आने देना चाहिए कि हिंदू इन दंगाइयों को उनकी ही भाषा में हिंदू बहुल क्षेत्रों में प्रत्युत्तर देने लगे। इसका दायित्व भारत के सभी प्रबुद्ध लोगों और राजनीतिक दलों का ही है। यदि ऐसा हुआ तो क्या परिणाम होगा, इसका विचार सरलता से किया जा सकता है। किन्तु एक तथ्य स्मरण रखना चाहिए, जहां हिंदू अल्पसंख्यक है क्या वह वहां सदा पिटता रहा है या पिटता रहेगा? इतिहास बता रहा है अब यह सत्य नहीं है। मुजफ्फरनगर, शामली, शिव विहार आदि कई स्थानों के अनुभव जेहादी नेता भूले नहीं होंगे। 

विश्व हिंदू परिषद देश की सभी सरकारों और राजनीतिक दलों से अपील करती कि वे अपने राजनीतिक स्वार्थ को छोड़कर देशहित का विचार करें। देश को विकासमार्ग पर ले जाने के अपने दायित्व को स्वीकार करें। उन्हें इतिहास का ध्यान रखना चाहिए कि मोहम्मद बिन कासिम का साथ देने वाले जयचंद की क्या दुर्गति हुई थी। अपने स्वार्थ के लिए देश हित की बली चढ़ाने वालों की दुर्गति यही होती है। 

विहिप हिन्दू समाज का भी आह्वान करती है कि 'पलायन नहीं पराक्रम' हिन्दू का संकल्प रहा है। जहाँ की सरकारें दंगाईयों पर कठोर कार्यवाही कर रही हैं, उनका साथ दें और जहाँ वे दंगाइयों के साथ हैं, वहाँ अपने सामर्थ्य को जागृत करें। हमें दंगाइयों से भयभीत न होते हुए स्वाभिमान पूर्ण जीवन जीने की परिस्थितियों का निर्माण करना है। दंगाइयों को स्मरण रखना चाहिए, यह 1946 नहीं है। संकल्प और शौर्यवान हिंदू उनके षड्यंत्रों को सफल नहीं होने देगा।
 
- तिलक रेलन आज़ाद वरिष्ठ पत्रकार,  
युगदर्पण®2001 मीडिया समूह YDMS👑 

 https://vhp.org/press_releases/ 

कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका; विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक

'विदेशमंत्री एस जयशंकर ने मानवाधिकार पर अमरीका को दिखाया दर्पण, 'त्वरित हुआ विख्यात।'

 'विदेशमंत्री एस जयशंकर ने मानवाधिकार पर अमरीका को दिखाया दर्पण, 'त्वरित हुआ विख्यात।'

*1/285, विश्व, राष्ट्रनीति, संविधान और वैश्विक👑 सम्बन्ध:* 
*▶CD-Live YDMS👑 चयनदर्पण* 

*युदस नदि 16 अप्रैल 2022:* वीके कृष्‍ण मेनन ने जो घंटों में कहा, मैं 6 मिनट में बोल सकता हूं'। 
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भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर अमेरिका ने टिप्‍पणी की तो सटीक उत्तर तुरंत मिल गया। जब अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने भारतीय मंत्रियों के सामने मानवाधिकार का विषय उठाया तो विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका की मानवाधिकार स्थिति पर ध्यान दिलाया। जयशंकर का उत्तर सोशल मीडिया पर वायरल है। जयशंकर ने भारत पर प्रश्न उठाने वाले समूहों को भी स्पष्ट संदेश दे दिया है। यह प्रथम बार नहीं, जब जयशंकर ने अपने स्पष्टवादिता से प्रशंसा पाई हो। वह पहले भी अपनी कटु सत्य बात कहने के लिए जाने जाते हैं। और ख्याति पाते हैं। 

इस बार से लाखों हो गए जयशंकर के प्रशंसक। 
कांग्रेस शासन में जिसे सम्मान मिला नहीं, अब मोदी शासन में उसे ब्याज सहित मिल रहा है। 

- तिलक रेलन आज़ाद वरिष्ठ पत्रकार,  
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राजनाथ सिंह वैश्विक सम्बन्धों पर:

 राजनाथ सिंह वैश्विक सम्बन्धों पर: 

राजनाथ सिंह का रूस - भारत के सम्बन्धों पर भी अमेरिका को संदेश यदि हमारा किसी एक देश के साथ अच्छा संबंध है तो इसका अर्थ यह नहीं कि दूसरे देश के साथ अपने संबंध बिगाड़ लेंगे।

*युदस नदि 15 अप्रैल 2022:* देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका प्रवास पर है। राजनाथ सिंह ने आज अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित किया। अपने संबोधन के मध्य राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक शक्तिशाली देश के रूप में विश्व स्तर पर उभरा है और विश्व की शीर्ष 3 अर्थव्यवस्थाओं में एक होने के पथ पर अग्रसर है। इस सम्बोधन में उन्होंने विदेशी धरती से चीन को भी कठोर संदेश दिया।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए और चीन को चेतावनी देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि, “मैं खुलकर नहीं कह सकता कि उन्होंने (भारतीय सैनिकों) क्या किया और हमने (भारत सरकार) क्या निर्णय लिए। किन्तु मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि (चीन को) एक संदेश गया है कि यदि भारत को कभी कोई छेड़ेगा तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं। भारत की छवि बदल गई है। भारत का मान बढ़ा है।”

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन के माध्यम अमेरिका को भी रूस के साथ सम्बंधों के निमित्त संदेश दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि, “यदि भारत का एक देश के साथ अच्छा संबंध है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी अन्य देश के साथ उसके संबंध विपरीत हो जाएंगे। भारत ने इस प्रकार की कूटनीति कभी नहीं अपनाई है और न ही भारत इस प्रकार की कूटनीति कभी अपनाएगा। हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शून्य-सम खेल में विश्वास नहीं करते हैं।” 

- तिलक रेलन आज़ाद वरिष्ठ पत्रकार,  

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Tuesday, 15 March 2022

#वन्दे मातरम! राष्ट्रहित सर्वोपरि। इदं न मम्! इदं राष्ट्राय स्वाहा!

   #वन्दे मातरम! राष्ट्रहित सर्वोपरि। इदं न मम्! इदं राष्ट्राय स्वाहा! 

नकारात्मक भ्रामक मीडिया का सकारात्मक सार्थक विकल्प YDMS👑 

क्या आप भारत से प्रेम करते हैं एवं इसके मूल तत्व को मिटाने वाले कुचक्रों को रोकना चाहते हैं? राष्ट्रहित में देश की जड़ों से जुड़ना एवं जोड़ना चाहते है; तो प्रस्तुत है, नकारात्मक भ्रामक मीडिया का सकारात्मक सार्थक विकल्प YDMS👑 । आप किसी भी प्रदेश व भाषा से हों, किसी भी आयु वर्ग के, जाति समुदाय के महिला पुरूष हों, राष्ट्रीय चिंतन है तो जुड़ सकते हैं। अधिक समय क्षमता सामर्थ्य बिना देश के लिए कुछ समय, घर में बैठकर मोबाइल पर ही दे सकते हैं। 

काश्मीर से कन्याकुमारी, पूर्वोत्तर सीमांत से गुजरात भारत एक है! इस भावना से भारत का हर सपूत YDMS👑 पर आमंत्रित है। सर्व प्रादेशिक, विविध विषयों पर सर्वश्रेष्ठ सुव्यवस्थित बहुआयामी अधीकृत समाचार, आपका अधिकार है। 

भारत माता की संतान के नाते, भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने में सहयोग हमारा दायित्व। जिसकी पूर्ति हेतु परिवार के दायित्व पूर्ति में से कुछ समय लगाना आवश्यक है। 

आप यह मानते हैं, तो सनसनी मुक्त मीडिया के पाठक, प्रचारक, टेलीग्राम पर सक्रिय सहभागिता हेतु नीचे दिए गए प्रदेशों की सूची में से अपने प्रदेश, भाषा, विधा व शैली का चयन करें। 

अरुणाचल प्रदेश, 

असम, 

आंध्र प्रदेश, 

उत्तराखंड, 

उत्तर प्रदेश, 

ओड़ीसा, 

कर्नाटक, 

केरल, 

गुजरात, 

गोवा+पूना+द्वीप समूह 

छत्तीसगढ़, 

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मीज़ोरम, 

राजस्थान, 

हरियाणा, 

हिमाचल प्रदेश, 

 (, सप्त प्रदेश, , , , त्रिपुरा, )  

चंडीगढ़ केंशा, 

नई दिल्ली 

क्या आपकी आयु 60 से अधिक है और आप जीवन में जो अर्जित करना था कर चुके हैं? यदि हां, तो नाती पोतों में समय लगाने के साथ ही देश हित सोचने का समय आ गया है। 

इदं न मम्! शारीरिक क्षमता भले न सही, अनुभव तो है। समय तो है। भाव है- मेरे पास जो कुछ भी है, इस राष्ट्र का है, राष्ट्र के लिए है, राष्ट्र को समर्पित है। 

✔  एक 

✔ दो 

सारे तंत्र मंत्र यंत्र : 


लगभग सब कुछ 


आसपास वातावरण बनाना है 

भाषा में अनुवाद करना ह 

सकारात्मक समाचार का निर्माण 

समाज में संपर्क 

भारत में 130 करोड़ लोग रहते हैं उनमें से भारतीय वही, जो भारत के लिए समर्पित हैं। अन्य सभी हम पर, बोझ है विश्व गुरु के मार्ग की बाधा, नायक नहीं विदेशी खलनायक हैं। उनके लिए 70 वर्ष ऊर्जा नष्ट करते रहे हैं। किन्तु लंबे समय तक धर्म निरपेक्षता की आड़ में शर्म निरपेक्षता में राष्ट्रीय क्षमता लुटाते रहे हैं। भले ही भारत की मूल शक्तियां, सामर्थ्य जड़ों को मिटाकर स्वार्थ पूर्ति को प्राथमिकता दी गई। अब सब उलट सामान्य किया जा सकता है, ऐसे विकल्प उपलब्ध निर्माण हो रहे हैं।  जो इस मार्ग में बाधक हैं उनसे देश की क्षति को हम रोक सकते हैं। इन उपकरणों को आपके सहयोग के द्वारा आपका भविष्य सुधरेगा और आप अधिक सुरक्षित रहेंगे। अपने व अपनी आगामी पीढ़ियों के लिए वर्तमान को लगाने के अवसर को आधार बनाएं। 

आइए हम सब मिलकर भारत का भविष्य निर्माण का संकल्प लें! 

हाँ, मेरी आयु 60 वर्ष से अधिक है और मैं यह मानते हुए कि मेरे पास जो कुछ भी है, इस राष्ट्र का है, राष्ट्र के लिए है, राष्ट्र को समर्पित करना चाहता/चाहती हूं। 

भारत के 70 वर्षीय शासन में केवल स्वार्थ पर बल दिया गया, एवं समाज ने अधिकांश इसी का अनुसरण किया है जो नए, परिदृश्य में हम बदलना चाहते हैं। आप योग्य है कि नहीं, इसकी चिंता किए बिना YDMS👑 में विश्वास रखते हुए अपने मार्ग का चयन करें। तथा दिए गए निर्देशों का पालन करने का प्रयास करें। शेष हम कर ही रहे हैं। 

प्रथम पग: 

जिले सहित सूची में अपना प्रदेश चुनें। 

दूसरा पग: 

यदि आप जुड़ सकते है, तो कृपया अपना संपर्क नं सहित, विवरण छोड़ दें। प्रस्तुत सूची में से समूह चुनें, तथा अपनी सुविधानुसार दायित्व संभाल सकें। फिर इस व्यापक मीडिया समूह की विराट श्रृंखला व्यवस्था को एक शीर्ष मीडिया के स्थान तक ले जाने का कार्य कर सकते हैं।  

टेलीग्राम पर हमसे जुड़ें व अपना पूरा परिचय (प्रोफाइल) में विवरण अवश्य दें, मोबाइल नं सहित। हो सके तो फोन पर बात भी करें। 

- तिलक रेलन आज़ाद वरिष्ठ पत्रकार,  

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काश्मीरी पंडितों की 33 वर्ष पूर्व की पीड़ा, The Kashmir Files.

 The Kashmir Files | Official Trailer I Anupam I Mithun I Darshan I Pallavi I Vivek I 11 March 2022 *👉🌟1/49, शर्मनिरपेक्ष संविधान व शोधन:👈* *▶DD-Live YDMS👑 दूरदर्पण* *युदस नदि 14 मार्च 2022:* काश्मीरी पंडितों की 33 वर्ष पूर्व की पीड़ा, जिसे कांग्रेस ने बोया, सींचा और पाला पोसा। जिसे देखकर, उस पीड़ा को हर मानव अनुभव करेगा। t.me/ydmsjhj The Kashmir Files | Official Trailer I Anupam I Mithun I Darshan I Pallavi I Vivek I 11 March 2022. A must seen film based on real stories about tragedy of Kashmiri pandit faced about 33 year back. -तिलक रेलन आज़ाद वरिष्ठ पत्रकार संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS👑 https://youtube.com/playlist?list=PL3G9LcooHZf2U_6apbxRZdpCpvLeIsN2w 

फिल्म फैशन क्लब फंडा :--(चमकता काला सच)| 

Friday, 6 February 2015

ANTI LABOUR POLICIES

          RE-STRUCTURING OF CADRES IN PUBLIC SECTORS

In the Indian Railways cadre re-structuring of Group C & D staff is causing a huge shortage of manpower due to which the smooth functioning of the Railways is being hampered. The concept of cadre re-structuring in all the public sector offices was propagated by the World Bank when Dr.Manmohan Singh, was the Finance Minister. In order to privatize the entire public sector, to outsource all the public sector works to private parties, this concept of anti labour policy was imposed upon our country.

We must remember that India is an overpopulated & a 3rd world country which has huge manpower output, yet reeling under poverty due to economic backwardness. Here people need secure source of income which can only be provided by the public sector. Because the private sector won't hire manpower for charity. Which is creating a very complex situation for our country, specially the upcoming future generation. We can already see that due to population explosion on one hand & lack of secure source of income is already playing a havoc in our country. We can see graphically how the crime rate is increasing due to this social & economic insecurity

This is also creating huge gap amongst the upper class & the middle/lower middle & the lower class. Increasing corruption, top heavy attitude of higher bureaucracy, manipulation, over competition amongst the private sector, over consumption of our natural resources, these are just few outcome which we are seeing in our day to day life.

It is extremely intermittent that we stop such anti labour policies immediately so that a proper balance & proper economic distribution of wealth amongst all the classes of people. We can take example of countries like Denmark where the minimum wage earning 20 dollar per day, which reflects the stability in their society. If proper political will & economic balance is maintained towards all the classes of people in our country, we can achieve the social stability required.